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सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤² मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° à¤à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤«à¥€ à¤à¤• आनà¥à¤µà¤‚शिक बीमारी है. इस बीमारी के कई पà¥à¤°à¤•ार होते हैं. लेकिन इसमें टाइप-1 सबसे गंà¤à¥€à¤° होता है. वेबà¤à¤®à¤¡à¥€ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बीमारी में बचà¥à¤šà¤¾ अपने सिर को सहारा देने या बिना मदद के बैठने में सकà¥à¤·à¤® नहीं होता है. उसके हाथ और पैर ढीले हो सकते हैं और कà¥à¤› à¤à¥€ निगलने में समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है. सांस को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने वाली मांसपेशियों में कमजोरी के कारण, टाइप 1 à¤à¤¸à¤à¤®à¤ वाले अधिकांश बचà¥à¤šà¥‡ दो साल से अधिक जीवित नहीं रहते हैं.
कà¥à¤¯à¤¾ हैं लकà¥à¤·à¤£-
जो बचà¥à¤šà¥‡ सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤² मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° à¤à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤«à¥€ टाइप-1 से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ होते हैं, उनकी मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. शरीर में पानी की कमी होने लगती है और सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने में और सांस लेने में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दिकà¥à¤•त होती है. इस बीमारी से पीड़ित बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मांसपेशियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि वो हिलने-डà¥à¤²à¤¨à¥‡ लायक à¤à¥€ नहीं रहते हैं. सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤² मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° à¤à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤«à¥€ बीमारी के कारण बचà¥à¤šà¥‡ धीरे-धीरे इतने अकà¥à¤·à¤® हो जाते हैं कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सांस तक लेने के लिठवेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती है.
कितनी खतरनाक है बीमारी-
सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤² मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° à¤à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤«à¥€ टाइप-1 काफी खतरनाक बीमारी है. इस बीमारी के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° जीन शरीर में तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° के सà¥à¤šà¤¾à¤°à¥‚ रूप से कारà¥à¤¯ करने के लिठआवशà¥à¤¯à¤• पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करने के लिठरोकते हैं या बाधित करते हैं. जिसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° नषà¥à¤Ÿ हो जाता है और पीड़ित बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मौत हो जाती है.
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